सोमवार, 20 अप्रैल 2009

तुम में ही आगे .........

शब्द मैहूँ काव्य तुम हो लेखनी हो तुम
नारियो में श्रे स्ठ्तंम हो पद्रिमनी हो तुम
वाद्य मै हूँ राग तुम हो रागिनी हो तुम
देह से दूरी भले ह्रयाबसिनी हो तुम
पूर्णिमा की प्रेम वरनी चांदनी हो तुम
प्रेमसंध्या तप्तसीमा यामिनी हो तुम
पुत्रव्रत व्यवहृत शिशु मै प्रेयसी हो तुम
मुर्तरूपा सुन्दरी सी उर्वसी हो तुम
पुष्प मै हूँ तुम सुगन्धित चंदना हो तुम
मै कदाचित हूँ पिता तो नंदना हो तुम
वृछ मै हूँ तुम लता हो वल्लरी हो तुम
प्रेम पुष्पों से घिरी हो पल्लवी हो तुम
चित्र मै हूँ रंग तुम हो तूलिका हो तुम
जीवन शक्ति तुम्ही हो प्रेमिका हो तुम
प्रेम धन अर्जन करूँ अर्जना हो तुम

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