बुधवार, 22 अप्रैल 2009

तुम में ही आगे ...........

लक्ष्मी हो अम्बिका हो भारती हो तुम

मैं हूँ एकक तुम हो निजता मैं स्वम् हूँ तुम

अंत मैं हूँ तुम हो सीमा अतिपरम हो तुम

रंग तुम हो चित्र मैं हूँ चित्रावली हो तुम

छंद तुम हो मुक्तक हूँ मैदोहावली हो तुम

पुष्प तुम हो वृंत मैं हूँ वर्तिका हो तुम

प्रष्ठ मैं हूँ तुम कहानी पत्रयिकाहो तुम

मैं हूँ जीवन प्राण तुम हो प्रानदा हो तुम

दुग्ध सलिला पयोवछा शारदा हो तुम

मैं प्रभात हूँ तुम हो ऊषा अरुणिमा हो तुम

मैं हूँ मापक उन्नति का प्रतिविमा हो तुम

मैं प्रयासी जीव नन्हा उन्नति हो तुम

मैं प्रवाहित प्रेम सरिता अनुगति हो तुम

ताल मैं हूँ राग तुम हो संगतिहो तुम

मैं पथिक सन्मार्ग गामी sadamti

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